फ्लोटिंग आइकॉन

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Thursday, 1 May 2014

Inspired By

Inspired by
This post is dedicated to all those who helped me jagao the fire in me .
 I was inspired to blog by my Guru's Grace
His Divine Holiness Param Pujya Sant Shri Ashramji Bapu

&
My Ishta ,Mata Saraswati


Those of you who have read Shri Yoga Vashishtha Maharamayan might be knowing in the story of Lilavati (Utpatti Prakaran), Devi Saraswati gives away the divine knowledge to Lila so that she is liberated.



Bapuji says

 हे विद्यार्थी! तू भारत का भविष्य, विश्व का गौरव और अपने माता-पिता की शान है। तेरे भीतर भी असीम सामर्थ का भण्डार छुपा पड़ा है। तू भी खोज ले ऐसे ज्ञानी पुरुषों को और उनकी करुणा-कृपा का खजाना पा ले। फिर देख, तेरा कुटुम्ब और तेरी जाति तो क्या, संपूर्ण विश्व के लोग तेरी याद और तेरा नाम लिया करेंगे।

O Student! You are the future of India, glory of the world and pride of your parents. There is an infinite potential hidden inside you. Find a self-realized Guru who has the capability of awakening it and benefit the treasure of mercy and grace of him.






By Kanika Didi , who is a sadhak & has the grace of Maa Saraswati on her , she creates awesome blog post & can be read at Kanika Writes , her poetic side can be accessed at The Real attains Melodies.

Didi & Me have a lot in common we both operate from public profiles , engage idiots who are our so called friends & both Live away from home.She has promised me that she'll write a guest post for me.


by Capt Ajit Vadakayil, awakening Indians through 800 years i.e 12 generations of slavery.
Must read for all Indians


Last & the leasts one , a Krantikari email which I got from a sewadar indicating our despo situation.

giving only 1 line from it , other part is EYES ONLY 

Bapuji toh nirdosh chut aayenge hi aur bharat vishva gur bankar hi rahega, par tab tak humein Suprachar Sewa badottari karni hogi


Latest Trend #MereBapuNirdoshHain






ॐ ॐ गुरूजी ॐ


Saturday, 12 April 2014

His Divine Holiness Sant Shri Asharamji Bapu

श्रीगुरुवन्दना

आसारामं परमसुखदं पूज्यपादं महान्तम्।
सन्तं शान्तं सकलगुणिनं ध्याननिष्ठं वरेण्यम्।
विद्याधारं प्रथितयशसं धर्ममूर्तिं धरायाम्।
वन्दे नित्यं भुवनविदितं प्राणीनां कल्पवृक्षम्।।1।।
धर्मार्थं यः सकलभुवने सत्यमार्गं प्रयाति।
सेवाभावैः शमयति सदा दैन्यदुःखं समेषाम्।
यातो यो नः चरणशरणं तस्य सर्वत्र सौख्यम्।
आसारामो वितरति गुरुर्वन्दनीयो नराणाम्।।2।।
धन्याः सर्वे नगरगृहिणो दर्शनं प्राप्य पुण्यम्।
जाता पूर्णा हृदयलसिता हार्दिकी कामना या।
श्रावं श्रावं विमलमनसा भक्तिगीतं पुनीतम्।
स्मारं स्मारं तव गुणगणं चित्तमग्नाः समे स्वे।।3।।
लोके पुण्यं प्रभवति यदा सर्वथा मानवानाम्।
साधूनां संप्रसरति तदा दर्शनं भाग्यसिद्धम्।
पूर्वपुण्यं प्रकटितमिदं सत्यमेतद् ध्रुवं नः।
ज्ञानालोकं सदयहृदयं त्वां नमामो गुरुं स्वम्।।4।।
कुर्वन्पुण्यं लसति सततं भा-रतं भारतं स्वम्।
राष्ट्र मान्यं निखिलभुवने धर्मिणामग्रगण्यम्।
यः सन्देशैः सहजदितैर्भावगीतैर्नवीनै-
र्दिव्यर्भव्यैरमृतसदृशैस्तं नुमो ज्ञानगम्यम्।।5।।
परम सुख देने वाले, शांत, सम्पूर्ण गुणों के निधि, ध्याननिष्ठ, श्रेष्ठ विद्या के आधार, प्रसिद्ध कीर्तिवाले, पृथ्वी पर धर्म की साक्षात् मूर्ति, विश्वविख्यात, समस्त प्राणियों के कल्पवृक्ष, पूज्यपाद महान् संत श्री आसारामजी बापू की वन्दना करते हैं।(1)
जो धर्म के प्रचार के लिए सम्पूर्ण विश्व में भ्रमण करते हैं, सेवाभाव से सभी के दुःख एवं दैन्य को सतत दूर करते हैं, जिनके चरण-शरण में आने वाले मनुष्य को सर्वत्र सौख्य प्राप्त होता है, ऐसे पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू सभी मनुष्य के वन्दनीय हैं।(2)
आज हम सभी नगर-गृहवासी आपके पवित्र दर्शन प्राप्त कर धन्य हैं। जो कामना हृदय में चिरलसित थी, वह पूर्ण हो गयी। विमल मन से आपकी भक्ति के पवित्र गीत सुन-सुनकर तथा आपके गुण-समूह को पुनः पुनः स्मरण कर सभी भक्तजन आनन्दमग्न हैं।(3)
संसार में जब मानवों के पूर्व पुण्यों का उदय होता है, तभी भाग्यसिद्ध संतों का दर्शन प्राप्त होता है। आज हमारा पूर्वपुण्य प्रकटित हुआ है यह सर्वथा सत्य है। अतः ज्ञान के प्रकाश, सदयहृदय अपने गुरु पूज्यपाद श्री आसारामजी बापू को हम नमन करते हैं।(4)
नित्य, दिव्य, भव्य एवं नवीन भावपूर्ण उपदेशों से जो भारत राष्ट्र को सम्पूर्ण विश्व में कीर्तियुक्त करते हुए शोभायमान हैं, ऐसे उन धार्मिकों में अग्रमण्य, ज्ञानगम्य संत श्री आसारामजी बापू हैं। हम उनको सतत नमन करते हैं।(5)